Gagandeep Gupta Gugli
ek aandhi, ek tufaan...
Tuesday, July 12, 2016
Monday, March 30, 2015
Honour of Padam Vibhushan is at stake!!!
Padam Vibhushan is awarded to recognize exceptional and extra ordinary service to Republic of India in any field. It has credit of being 2nd highest civilian award.
If above definition is true, do you think awards distributed in political arena for 2015 are fixed?
Pure bullshit and dishonour to so called PADAM VIBHUSHAN.
If above definition is true, do you think awards distributed in political arena for 2015 are fixed?
Pure bullshit and dishonour to so called PADAM VIBHUSHAN.
I'm glad that Indian freedom revolutionaries are not alive to see this.
Tuesday, January 13, 2015
इन्सान हैवान आज भी है (Dedicated to the children killed in Pakistan on Dec. 16, 2014)
उफ़! बस यही निकला देखकर,
वो खतरनाक, वो दर्दनाक मौत का मंज़र।
सोचता हूँ देखकर तस्वीरें ही 'गगन' की कलम रो पड़ी,
पर देखकर हकीकत में हर बशर को इक सिसकी तो आयी होगी।
हालत क्या होगी उस माँ की सोचो,
जो तैयार करके स्कूल छोड़ आयी होगी।
कहने को तो बाप रोते नहीं हैं,
पर इक हिचकी आज उस शख्स को भी आयी होगी।
कहीं फटी किताबें, कहीं इक जूता, तो कहीं पेंसिल ही थी,
सजी हुई ज़मीन खूब, खून के धब्बों से थी।
कसम से एक ऐसी खौफनाक मौत,
रब्बे इश्क को भी न कभी आयी होगी।
बख़्शे खुदा जन्नत उन नन्हें परिदों को,
ज़रा भी न मासूमियत दिखी उन दरिदों को।
ए खुदा! न लिखना ऐसी ज़िदगी रकीब की भी,
लिखते हुए तुझे भी हर इक माँ की याद तो आयी होगी।
गोलियाँ, बारूद के ढेर, परमाणु बम के खिलौने,
यही भाषा, यही धर्म, न बन जाये कहीं।
JESUS, अल्लाह, वाहेगुरु, भगवान् को भी,
आज अपनी कायनात याद आयी होगी।
कत्लेआम का होना सियासत की आड़ में लाज़मी है,
मौत को तो आना है, बात ये आम-सी है।
पर ऐसी मौत की शक्ल, बताता है अक्सर,
इन्सान हैवान आज भी है।
Tuesday, July 29, 2014
Eternal Hug!!!
Leaving the traces of happiness,
Eternal hug is there to surround me.
I thought I'm lonely,
But found just love around me.
Just lots of love around me :)
Eternal hug is there to surround me.
I thought I'm lonely,
But found just love around me.
Just lots of love around me :)
Tuesday, May 20, 2014
अंतरद्वन्द!!!
दिन प्रतिदिन बढ़ रहे,
सही और गलत के अंतरद्वन्द में,
आवाम सारी बढ़ रही है,
साम्प्रदायिकता के कोप भवन में।
किसी के वजूद का आकलन,
प्रतिबधता की कसौटी नहीं रहा,
बार बार फंस जाता है बस,
पैर फिर क्यों उसी भंवर में।
कुछ कदम तो तय करते हैं राह डगर की,
कुछ ले लेते हैं राहें पतन की,
"गगन" में उड़ते हैं जो परिंदे,
सही और गलत के अंतरद्वन्द में,
आवाम सारी बढ़ रही है,
साम्प्रदायिकता के कोप भवन में।
किसी के वजूद का आकलन,
प्रतिबधता की कसौटी नहीं रहा,
बार बार फंस जाता है बस,
पैर फिर क्यों उसी भंवर में।
कुछ कदम तो तय करते हैं राह डगर की,
कुछ ले लेते हैं राहें पतन की,
"गगन" में उड़ते हैं जो परिंदे,
आशियाना बनाते ज़मीं पे ही हैं।
Tuesday, May 6, 2014
देख तो ज़रा गौर से...
देख तो ज़रा गौर से,
रहा है गुज़र ये देश...इक दौर से,
सारा ज़हर बहाकर ले जाएगा अपने साथ,
ये सच्चाई का सैलाब सब और से।
गूंजेगा "गगन" में शंखनाद,
बरसेंगे बादल भी खास तौर से,
आँसू खुशी के होंगे आँखों में,
होंगे शब्द भी मेरे भाव-विभोर से।
तू देख तो ज़रा गौर से,
देख तो ज़रा गौर से |
रहा है गुज़र ये देश...इक दौर से,
सारा ज़हर बहाकर ले जाएगा अपने साथ,
ये सच्चाई का सैलाब सब और से।
गूंजेगा "गगन" में शंखनाद,
बरसेंगे बादल भी खास तौर से,
आँसू खुशी के होंगे आँखों में,
होंगे शब्द भी मेरे भाव-विभोर से।
तू देख तो ज़रा गौर से,
देख तो ज़रा गौर से |
Friday, April 11, 2014
दिल चीज़ क्या है?
दिल चीज़ क्या है?
इक तोहफ़ा रफ़ीक का,
या फिर मेरा ही रकीब़ सा,
रहता है जो मेरे ही सीने में,
पर तरफ़दार है मेरे हबीब़ का।
दिल चीज़ क्या है?
इक टुकड़ा माँस का,
या फिर एक पत्थर काँच सा,
चटक जाता है एक ही झटके में,
पर ये खेल है सब नसीब का।
दिल चीज़ क्या है?
घर मेरे महबूब का,
या फिर एक मकान बिना सुकून का,
कोई रह जाता है तो कोई जाता है चला,
क्या कुसूर इस मासूम बदनसीब का?
दिल चीज़ क्या है?
पूछा 'गगन' से तो पता चला,
ये होता उदास है कभी,
तो कभी मगन होता चला,
मगर है ये एक हसीं जानलेवा बला।
दिल चीज़ क्या है?
दिल चीज़ क्या है?
दिल चीज़ क्या है?
इक तोहफ़ा रफ़ीक का,
या फिर मेरा ही रकीब़ सा,
रहता है जो मेरे ही सीने में,
पर तरफ़दार है मेरे हबीब़ का।
दिल चीज़ क्या है?
इक टुकड़ा माँस का,
या फिर एक पत्थर काँच सा,
चटक जाता है एक ही झटके में,
पर ये खेल है सब नसीब का।
दिल चीज़ क्या है?
घर मेरे महबूब का,
या फिर एक मकान बिना सुकून का,
कोई रह जाता है तो कोई जाता है चला,
क्या कुसूर इस मासूम बदनसीब का?
दिल चीज़ क्या है?
पूछा 'गगन' से तो पता चला,
ये होता उदास है कभी,
तो कभी मगन होता चला,
मगर है ये एक हसीं जानलेवा बला।
दिल चीज़ क्या है?
दिल चीज़ क्या है?
दिल चीज़ क्या है?
Tuesday, March 11, 2014
सब में अपना ही अक्स दिखे...
जब भी हाथ बढ़ा तू,
कितना अच्छा हो ग़र सब में अपना ही अक्स दिखे।
न रहे कोई भी अनपढ़, न ही कोई औरत बिके,
सब में अपना ही अक्स दिखे।
कितना अच्छा हो ग़र सब में अपना ही अक्स दिखे।
न रहे कोई भी अनपढ़, न ही कोई औरत बिके,
सब में अपना ही अक्स दिखे।
Tuesday, January 14, 2014
Angels...
Angels come &
Angels go.
Some stay for a
while,
And make people happy,
in a row.
A li'l baby &
a lonely soul.
Being an orphan,
was her fate.
She was an angel,
no one knew.
But someone appeared,
for her rescue.
A couple, with a big
enough heart.
Adopted that angel &
saved in love cart.
Orphans are the people,
like the mountain dew.
But, who knew the value,
are very few!
Note: Met a couple who adopted 3 kids and have 2 own :)
Angels go.
Some stay for a
while,
And make people happy,
in a row.
A li'l baby &
a lonely soul.
Being an orphan,
was her fate.
She was an angel,
no one knew.
But someone appeared,
for her rescue.
A couple, with a big
enough heart.
Adopted that angel &
saved in love cart.
Orphans are the people,
like the mountain dew.
But, who knew the value,
are very few!
Note: Met a couple who adopted 3 kids and have 2 own :)
Sunday, November 24, 2013
Sunday, June 30, 2013
अक्स...एक झलक!
देखकर तुझे क्या खूब याद आयी है मेरे महबूब की,
इनायत है मेरे इश्क, मेरे खुदा और मेरे मकतूब की,
तेरे अक्स पे ही जो फिदा हो गया है इतना,
अरे हुज़ूर! एक बार सोचिए तो ज़रा,
क्या हालत होगी "गगन" के गुस्ताख दिल बे-कसूर की।
Wednesday, May 29, 2013
Bahaar-e-Blossoms :)
English Version:
==========
*Blossoms come and blossoms go,
They might be awesome though,
When friends meet after a while,
"gagan" Blossoms stay for years in a row :) *
Hindi Version:
=========
E Bahaar! Ruk ja abhi mere yaar ko aane de,
Tu aati har saal hai vo aata kabhi kabhi hai.
Palkon pe intezaar aur aankhon mein nami hai,
"Gagan" Barson baad milne ka mazaa aata hi tabhi hai.
==========
*Blossoms come and blossoms go,
They might be awesome though,
When friends meet after a while,
"gagan" Blossoms stay for years in a row :) *
Hindi Version:
=========
E Bahaar! Ruk ja abhi mere yaar ko aane de,
Tu aati har saal hai vo aata kabhi kabhi hai.
Palkon pe intezaar aur aankhon mein nami hai,
"Gagan" Barson baad milne ka mazaa aata hi tabhi hai.
Monday, December 31, 2012
Delhi Case...!!!
आज फिर मेरी कलम चलने को तैयार हो गयी,
लगा उसकी आत्मा वहशीपन का शिकार हो गयी,
मानवता को डस लिया मानवता ने ऐसे,
खून की नलियाँ जैसे ज़हरीला बहाव हो गयीं।
इक मासूम, इक लड़की, तन्हा-ओ-बेबस,
बस इसलिये कर दी गयी,
क्योंकि एक बस चार दरिंदे लिये,
शान से चलती गयी।
न कहूँगा उन्हें जानवर,
कि जानवर तो जान वार देते हैं,
वो चार हैं वही वहशी दरिंदे,
जिन्हें हम समाज में पनाह देते हैं।
बहादुर करार दिया उस मासूम को,
कि वो अब तक मरी नहीं, जली नहीं,
ज़िंदा भी है अब तलक जो,
कि साँसें अभी रुकी नहीं।
इशारों में पुछती है माँ-बाप से,
क्या मिलेगा इंसाफ़ इस दर्द का?
क्या होगा ईलाज इस मर्ज़ का?
कि जागेगी आवाम इस पाप से।
कोख से जन्मे मेरी जो,
मेरा ही दामन दाग़दार कर दिया,
चंद हवस के पुतलों ने,
हर माँ को शर्मसार कर दिया।
सज़ा हो फाँसी या फिर,
नपुंसक हर उस शख़्स को बनाने की,
ज़रुरत है तो बस आज,
और मासूमों की लाज बचाने की।
क्यों न 'गगन' हो कुछ ऐसा कानून,
कि सहर जायें कब्रों के मुर्दे भी,
हर आरोपी का हश्र हो ऐसा,
निकाल दो आँखें, दिल और गुर्दे भी।
एक इल्तज़ाः
=========
वो जो एक मासूम जान,
लेटी मरणशया पर कराह रही है,
मेरी कलम क्या लिखे और,
सोचकर ही उसकी जान जा रही है।
दुआ है बस दोस्तो!
कर सको तो करो उसके लिये,
वरना तो जीना भी है मुश्किल,
इस जहाँ में खुदा के लिये।
लगा उसकी आत्मा वहशीपन का शिकार हो गयी,
मानवता को डस लिया मानवता ने ऐसे,
खून की नलियाँ जैसे ज़हरीला बहाव हो गयीं।
इक मासूम, इक लड़की, तन्हा-ओ-बेबस,
बस इसलिये कर दी गयी,
क्योंकि एक बस चार दरिंदे लिये,
शान से चलती गयी।
न कहूँगा उन्हें जानवर,
कि जानवर तो जान वार देते हैं,
वो चार हैं वही वहशी दरिंदे,
जिन्हें हम समाज में पनाह देते हैं।
बहादुर करार दिया उस मासूम को,
कि वो अब तक मरी नहीं, जली नहीं,
ज़िंदा भी है अब तलक जो,
कि साँसें अभी रुकी नहीं।
इशारों में पुछती है माँ-बाप से,
क्या मिलेगा इंसाफ़ इस दर्द का?
क्या होगा ईलाज इस मर्ज़ का?
कि जागेगी आवाम इस पाप से।
कोख से जन्मे मेरी जो,
मेरा ही दामन दाग़दार कर दिया,
चंद हवस के पुतलों ने,
हर माँ को शर्मसार कर दिया।
सज़ा हो फाँसी या फिर,
नपुंसक हर उस शख़्स को बनाने की,
ज़रुरत है तो बस आज,
और मासूमों की लाज बचाने की।
क्यों न 'गगन' हो कुछ ऐसा कानून,
कि सहर जायें कब्रों के मुर्दे भी,
हर आरोपी का हश्र हो ऐसा,
निकाल दो आँखें, दिल और गुर्दे भी।
एक इल्तज़ाः
=========
वो जो एक मासूम जान,
लेटी मरणशया पर कराह रही है,
मेरी कलम क्या लिखे और,
सोचकर ही उसकी जान जा रही है।
दुआ है बस दोस्तो!
कर सको तो करो उसके लिये,
वरना तो जीना भी है मुश्किल,
इस जहाँ में खुदा के लिये।
Saturday, October 20, 2012
ये हमें पता न था!!!
यूं चल निकलेगा मुबारकबाद का सिलसिला,
कि मेरी कब्र पर भी,
वो फूल ले आयेंगे।
और कुछ इस तरह ही होगी हासिल,
उनके गुलाब की खुशबू,
ये हमें पता न था।
क्या कहें,
उनके इश्क का अन्दाज़,
ह्में पसन्द आया।
ळोग तो बस नाम के लिये चन्द लम्हें रुककर चल दिये,
मगर विदा करने "खुदा" खुद आयेगा,
ये हमें पता न था।
मुबारकबाद चलती रही,
चलता रहा फूलों का दौर भी,
मेरी पास बैठा था आज कोई और भी।
वो आज बे-इन्तहा प्यार,
कुछ इस कद्र जतायेंगे,
ये हमें पता न था।
टूट रही थी कहीं,
कुछ और साँसों की डोर भी,
हो रहा था हल्का सा शोर भी।
मैं बस इतना ही सुन पाया उस शोर में,
"गगन! तेरी मोहब्बत कुछ इस तरह खींच लायेगी,
ये हमें पता न था।"
Tuesday, September 11, 2012
Friday, April 6, 2012
बिक गया दिल मेरा!!!
यूँ हम पर वो एहसान करते,
तो शायद ये उनकी तौहीन होती,
इसीलिये मांग लिया मेरा दिल,
उन्होंने अपने दिल के बदले में।
बिक गया दिल मेरा, बस एक दिल के बदले में...
हम भी खुश थे,
कि यूँ ही किसी को दिल नहीं दिया,
"गगन" का दिल बिका तो सिर्फ,
एक दिल के बदले में।
बिक गया दिल मेरा, बस एक दिल के बदले में...
इसे मेहरबानी कहूँ,
तो उनको ये गंवारा न होगा,
कहूँ इसे सौदा अगर,
तो शुमार हूँगा मैं बेईमानों की फेहरिस्त में।
बिक गया दिल मेरा, बस एक दिल के बदले में...
दिल के बदले दौलत तो दस्तूर रहा है,
लेकिन मिले जो दिल बदले में दिल के,
ऐसी खरीद कहाँ आज के ज़माने में कोई और होगी,
इसिलिये दे रहा हूँ नाम 'कहानी' हकीकत के सदके में।
बिक गया दिल मेरा, बस एक दिल के बदले में...
तो शायद ये उनकी तौहीन होती,
इसीलिये मांग लिया मेरा दिल,
उन्होंने अपने दिल के बदले में।
बिक गया दिल मेरा, बस एक दिल के बदले में...
हम भी खुश थे,
कि यूँ ही किसी को दिल नहीं दिया,
"गगन" का दिल बिका तो सिर्फ,
एक दिल के बदले में।
बिक गया दिल मेरा, बस एक दिल के बदले में...
इसे मेहरबानी कहूँ,
तो उनको ये गंवारा न होगा,
कहूँ इसे सौदा अगर,
तो शुमार हूँगा मैं बेईमानों की फेहरिस्त में।
बिक गया दिल मेरा, बस एक दिल के बदले में...
दिल के बदले दौलत तो दस्तूर रहा है,
लेकिन मिले जो दिल बदले में दिल के,
ऐसी खरीद कहाँ आज के ज़माने में कोई और होगी,
इसिलिये दे रहा हूँ नाम 'कहानी' हकीकत के सदके में।
बिक गया दिल मेरा, बस एक दिल के बदले में...
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