Monday, December 31, 2012

Delhi Case...!!!

आज फिर मेरी कलम चलने को तैयार हो गयी,
लगा उसकी आत्मा वहशीपन का शिकार हो गयी,
मानवता को डस लिया मानवता ने ऐसे,
खून की नलियाँ जैसे ज़हरीला बहाव हो गयीं।

इक मासूम, इक लड़की, तन्हा-ओ-बेबस,
बस इसलिये कर दी गयी,
क्योंकि एक बस चार दरिंदे लिये,
शान से चलती गयी।

न कहूँगा उन्हें जानवर,
कि जानवर तो जान वार देते हैं,
वो चार हैं वही वहशी दरिंदे,
जिन्हें हम समाज में पनाह देते हैं।

बहादुर करार दिया उस मासूम को,
कि वो अब तक मरी नहीं, जली नहीं,
ज़िंदा भी है अब तलक जो,
कि साँसें अभी रुकी नहीं।

इशारों में पुछती है माँ-बाप से,
क्या मिलेगा इंसाफ़ इस दर्द का?
क्या होगा ईलाज इस मर्ज़ का?
कि जागेगी आवाम इस पाप से।

कोख से जन्मे मेरी जो,
मेरा ही दामन दाग़दार कर दिया,
चंद हवस के पुतलों ने,
हर माँ को शर्मसार कर दिया।

सज़ा हो फाँसी या फिर,
नपुंसक हर उस शख़्स को बनाने की,
ज़रुरत है तो बस आज,
और मासूमों की लाज बचाने की।

क्यों न 'गगन' हो कुछ ऐसा कानून,
कि सहर जायें कब्रों के मुर्दे भी,
हर आरोपी का हश्र हो ऐसा,
निकाल दो आँखें, दिल और गुर्दे भी।

एक इल्तज़ाः
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वो जो एक मासूम जान,
लेटी मरणशया पर कराह रही है,
मेरी कलम क्या लिखे और,
सोचकर ही उसकी जान जा रही है।

दुआ है बस दोस्तो!
कर सको तो करो उसके लिये,
वरना तो जीना भी है मुश्किल,
इस जहाँ में खुदा के लिये।

Saturday, October 20, 2012

ये हमें पता न था!!!


 यूं चल निकलेगा मुबारकबाद का सिलसिला,

कि मेरी कब्र पर भी,

वो फूल ले आयेंगे।

और कुछ इस तरह ही होगी हासिल,

उनके गुलाब की खुशबू,

ये हमें पता न था।


क्या कहें,

उनके इश्क का अन्दाज़,

ह्में पसन्द आया।

ळोग तो बस नाम के लिये चन्द लम्हें रुककर चल दिये,

मगर विदा करने "खुदा" खुद आयेगा,

ये हमें पता न था।


मुबारकबाद चलती रही,

चलता रहा फूलों का दौर भी,

मेरी पास बैठा था आज कोई और भी।

वो आज बे-इन्तहा प्यार,

कुछ इस कद्र जतायेंगे,

ये हमें पता न था।


टूट रही थी कहीं,

कुछ और साँसों की डोर भी,

हो रहा था हल्का सा शोर भी।

मैं बस इतना ही सुन पाया उस शोर में,

"गगन! तेरी मोहब्बत कुछ इस तरह खींच लायेगी,

ये हमें पता न था।"

Friday, April 6, 2012

बिक गया दिल मेरा!!!

यूँ हम पर वो एहसान करते,

तो शायद ये उनकी तौहीन होती,

इसीलिये मांग लिया मेरा दिल,

उन्होंने अपने दिल के बदले में।

बिक गया दिल मेरा, बस एक दिल के बदले में...



हम भी खुश थे,

कि यूँ ही किसी को दिल नहीं दिया,

"
गगन" का दिल बिका तो सिर्फ,

एक दिल के बदले में।

बिक गया दिल मेरा, बस एक दिल के बदले में...



इसे मेहरबानी कहूँ,

तो उनको ये गंवारा होगा,

कहूँ इसे सौदा अगर,

तो शुमार हूँगा मैं बेईमानों की फेहरिस्त में।

बिक गया दिल मेरा, बस एक दिल के बदले में...



दिल के बदले दौलत तो दस्तूर रहा है,

लेकिन मिले जो दिल बदले में दिल के,

ऐसी खरीद कहाँ आज के ज़माने में कोई और होगी,

इसिलिये दे रहा हूँ नाम 'कहानी' हकीकत के सदके में।

बिक गया दिल मेरा, बस एक दिल के बदले में...