Sunday, June 30, 2013

अक्स...एक झलक!

देखकर तुझे क्या खूब याद आयी है मेरे महबूब की,

इनायत है मेरे इश्क, मेरे खुदा और मेरे मकतूब की,

तेरे अक्स पे ही जो फिदा हो गया है इतना,

अरे हुज़ूर! एक बार सोचिए तो ज़रा,

क्या हालत होगी "गगन" के गुस्ताख दिल बे-कसूर की।

No comments:

Post a Comment